शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

HINDI HEALTH TIPS सर्दी सेहत बनाने का मौसम है

सर्दी सेहत बनाने का मौसम है। खूब सारे फल आते हैं, पाचन-शक्ति अच्छी होती है और खूब भूख भी लगती है। कहा जाता है कि जो लोग जिम जाकर बॉडी बनाना चाहते हैं, उनके लिए भी यह मौसम बड़े काम का है। इस मौसम में स्वस्थ रहने और सर्दी से बचने के लिए बाहरी उपायों के अतिरिक्त हमारे यहां खान-पान पर भी जोर दिया जाता है। इस मौसम में पत्थर भी पचाए जा सकते हैं।इस मौसम में सर्दी-जुकाम होने की आशंका ज्यादा रहती है, ऐसे में अपने शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक्सपर्ट अपने खाने में नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट्स को शामिल करने का सुझाव देते हैं। ठंड के मौसम में अपने खाने में आंवले को शामिल करें। सीधे नहीं खा सकते हैं तो या तो मुरब्बे के तौर पर या फिर किसी और तरह से हर दिन के खान-पान में इस्तेमाल करें। यदि आप डाइट चार्ट का पालन कर रहे हैं तो फिर आंवला मुरब्बा लेने की बजाय किसी और रूप में लें।
इसके साथ ही अजवाइन भी शरीर को गर्मी देने का अच्छा स्रोत है। इससे भी आप कोल्ड एंड फ्लू से बचाव कर सकते हैं। गुड़ और शहद भी सर्दियों के दिनों में अच्छा माना जाता है। तिल्ली और गुड़ के लड्डू सर्दी से बचाव के लिए बेहतरीन उपाय माना जाता है। ठंड के मौसम में सूखे मेवे, बादाम आदि का सेवन भी लाभदायक होता है। या तो इन्हें भिगोकर खाएं या दूध में मिलाकर या फिर सूखे मेवों का दरदरा पावडर-सा बना लें और इसे दूध में मिलाकर प्रोटीन शेक-सा बना लें।

health tips सर्दियों का मौसम खान-पान

सर्दियों का मौसम खान-पान के लिहाज से यूं भी बेहद अच्छा माना जाता है। इस मौसम में फल-सब्जियों और ड्रायफ्रूट्स तक की बहार रहती है। इसलिए ठंड के दिनों में पारंपरिक तौर पर भी बादाम या खसखस के हलवे तथा बाजरा की घी डली खिचड़ी से लेकर अमरूद, पालक, मैथी, गाजर, टमाटर आदि जैसी अनेक पौष्टिक चीजों का मजा आसानी से लिया जाता है। कुल मिलाकर यह सेहत बनाने के दिन होते हैं

सर्दियों में फल और सब्जियों के रूप में ही आप खासे विटामिन और खनिज शरीर को दे सकते हैं। आइए नजर डालते हैं, ऐसे ही पोषक तत्वों से भरपूर अमरूद पर।
खाने में खट्टे और मीठे दोनों तरह के स्वाद से बने इस फल की खासियत यह है कि यह हर आदमी की पहुंच में आने वाला, सहज उपलब्ध फल है लेकिन गुणों के मामले में यह कई महंगे फलों पर भारी पड़ता है। अमरूद, बिही या जामफल जैसे कई नामों से पुकारे जाने वाले इस फल में विटामिन 'सी' कई अन्य सिट्रस फ्रूट्स के मुकाबले 4 से 10 गुना तक ज्यादा होता है। यह विटामिन शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है। इसमें थोड़ी मात्रा में विटामिन 'ए' या कैरोटिन भी होता है। इसमें कई खनिज लवण भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। 
जितना ज्यादा पका हुआ अमरूद होगा, उतनी ही इन सारे पौष्टिक तत्वों की मात्रा भी उसमें बढ़ी हुई होगी। डॉक्टर्स भी बेहद पके अमरूद को खाने की सलाह अक्सर हीमोग्लोबीन की कमी होने पर देते हैं। इसलिए महिलाओं के लिए यह और भी लाभदायक हो जाता है। इसमें फास्फोरस तथा कैल्शियम जैसे तत्व भी खासी मात्रा में होते हैं, जो हड्डियों के लिए फायदेमंद होते हैं।
1. अमरूद आहार फाइबर, विटामिन सी, विटामिन ए और विटामिन ई की एक अमीर souce यह भी फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैंगनीज और तांबे शामिल है.
2. अमरूद एक रेचक फल के है. आहार फाइबर का एक समृद्ध souce होने के नाते, यह कब्ज के इलाज में मदद करता है.3. अमरूद विटामिन और खनिज कि त्वचा को स्वस्थ, ताजा और शिकन मुक्त रखने में मदद के साथ पैक किया जाता है.
4. अमरूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट विटामिन प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के सी होता है. यह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कैंसर की रोकथाम और विरोधी उम्र बढ़ने में मदद करता है.
5. अमरूद में मैग्नीशियम और शरीर में तंत्रिकाओं और मांसपेशियों को आराम में मदद करता है.
6. अमरूद में पोटेशियम सामान्य रक्तचाप unbalancing में सोडियम की भूमिका के पीछे से रक्तचाप को विनियमित करने में मदद करता है.
7. अमरूद विटामिन सी जो सर्दी और खांसी की तरह वायरल संक्रमण को रोकने में मदद करता है में समृद्ध है. यह भी प्रभावी ढंग से स्कर्वी के उपचार में मदद करता है.
8. अमरूद बहुत अच्छा कसैले गुण है. यह दस्त या पेचिश जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं के उपचार में मदद करता है.
9. विटामिन ए और अमरूद में फाइबर सामग्री के बृहदान्त्र श्लेष्म झिल्ली की रक्षा में मदद करता है.
10. अमरूद एक कोलेस्ट्रॉल मुफ्त फल है. यह संतुष्ट है और एक लंबे समय के लिए भूख से पेट मुक्त रहता है. यह वजन कम करने में मदद करता है और मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करता है.
अमरूद भी साथ एक महान रस फल है. यह गहरे हरे रंग की सब्जियों / पत्तियों के किनारे से दूर ले और एक स्वाभाविक रूप से मीठा ऊर्जा पेय के लिए कर सकते हैं.

सर्दियों का राजा : अमरूद 9888276707

सर्दियों का मौसम खान-पान के लिहाज से यूं भी बेहद अच्छा माना जाता है। इस मौसम में फल-सब्जियों और ड्रायफ्रूट्स तक की बहार रहती है। इसलिए ठंड के दिनों में पारंपरिक तौर पर भी बादाम या खसखस के हलवे तथा बाजरा की घी डली खिचड़ी से लेकर अमरूद, पालक, मैथी, गाजर, टमाटर आदि जैसी अनेक पौष्टिक चीजों का मजा आसानी से लिया जाता है। कुल मिलाकर यह सेहत बनाने के दिन होते हैं

सर्दियों में फल और सब्जियों के रूप में ही आप खासे विटामिन और खनिज शरीर को दे सकते हैं। आइए नजर डालते हैं, ऐसे ही पोषक तत्वों से भरपूर अमरूद पर।

खाने में खट्टे और मीठे दोनों तरह के स्वाद से बने इस फल की खासियत यह है कि यह हर आदमी की पहुंच में आने वाला, सहज उपलब्ध फल है लेकिन गुणों के मामले में यह कई महंगे फलों पर भारी पड़ता है। अमरूद, बिही या जामफल जैसे कई नामों से पुकारे जाने वाले इस फल में विटामिन 'सी' कई अन्य सिट्रस फ्रूट्स के मुकाबले 4 से 10 गुना तक ज्यादा होता है। यह विटामिन शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है। इसमें थोड़ी मात्रा में विटामिन 'ए' या कैरोटिन भी होता है। इसमें कई खनिज लवण भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। 
जितना ज्यादा पका हुआ अमरूद होगा, उतनी ही इन सारे पौष्टिक तत्वों की मात्रा भी उसमें बढ़ी हुई होगी। डॉक्टर्स भी बेहद पके अमरूद को खाने की सलाह अक्सर हीमोग्लोबीन की कमी होने पर देते हैं। इसलिए महिलाओं के लिए यह और भी लाभदायक हो जाता है। इसमें फास्फोरस तथा कैल्शियम जैसे तत्व भी खासी मात्रा में होते हैं, जो हड्डियों के लिए फायदेमंद होते हैं

सेहत,लाइफ स्‍टाइल,

* पानी पिएं : 

पानी आपके शरीर का प्रमुख तत्व है, आपके वजन का करीब 60 प्रतिशत अंश पानी ही होता
है। शरीर की एक-एक प्रणाली को पानी की आवश्यकता होती है (औसतन एक वयस्क को हर रोज न्यूनतम 1.5 लीटर पानी चाहिए)।
नमक की मात्रा कम करें : 

तेज नमक वाले व्यंजनों जैसे अचार, पापड़, चटनी, नमकीन-दही, केन्ड सूप और सब्जियों से बचें, क्योंकि इनमें नमक की मात्रा सामान्य से अधिक होती है (प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक आदर्श होता है)।

* ताजा सब्जियां और फल अधिक से अधिक खाएं। 

* वजन कम रखें : 
अतिरिक्त वजन की वजह से भी आपकी सेहत के मामले में जोखिम बढ़ता है और आपको हृदय रोगों तथा मधुमेह जैसे रोगों के होने की आशंका अधिक हो जाती है। यदि आपका वजन सामान्य से अधिक है या आप मोटापे के शिकार हैं तो अपने खान-पान में धीरे-धीरे, मगर सेहतमंद बदलाव लाने की शुरुआत कर दें। 

अपनी शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं (हर रोज एक समय पर वजन लें, खासतौर से सवेरे उठने के बाद और दिन में पहली बार पेशाब करने के बाद)। यदि एक दिन में वजन 1 /1-1 किग्रा या एक सप्ताह में 1-2 किग्रा से ज्यादा बढ़े तो तुरंत इस बारे में सलाह करें।

शारीरिक रूप से चुस्त बनें : 

व्यायाम करने से शरीर की ताकत बढ़ती है और हृदय समेत अन्य अंगों की मांसपेशियां भी मजबूत बनती हैं। धीरे-धीरे व्यायाम की आदत बनाएं ताकि शरीर में खुद-ब-खुद क्षमता भी विकसित हो जाए। शारीरिक व्यायाम के लिए आप अलग-अलग एरोबिक्स गतिविधियों को अपना सकते हैं। तैराकी, साइकल चलाना आदि। 

* धूम्रपान छोड़ें : 

धूम्रपान की वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। व्यायाम करने की क्षमता घटती है और रक्त का थक्का जमने की जोखिम भी अधिक रहती है। 

इन उपायों पर अमल कर आप उत्तम स्वास्थ्य की राह पर चल सकते हैं।

health in hindi tips neurotherapy (च्युंइगम चबाने से होता है सिरदर्द)

   

ऊब से बचने के लिए और खुद को अधिक ऊर्जावान दिखाने के लिए हम अक्सर च्युंइगम का सहारा लेते हैं दरअसल इजरायल में तेल अवीव विश्वविद्यालय के मेर मेडिकल सेटर ने एक नए शोध में इसका खुलासा किया है कि बच्चों और किशारों को च्युंइगम चबाने की आदत होती है जिससे उनमें सिरदर्द का खतरा बढ़ जाता है। मेर मेडिकल सेंटर के डॉ. नैथन वॉटेमबर्ग की अगुवाई में वैज्ञानिकों के एक दल ने प्रयोग करके इस तथ्य को साबित किया कि च्युइंगम की आदत छोड़ने से सिरदर्द की संभावना काफी घट जाती है। 

शोध के दौरान डॉ. वॉटेमबर्ग ने लगातार सिरदर्द और माइग्रेन से पीड़‍ित एवं च्युंइगम चबाने की आदत से मजबूर 6 से 19 साल के 30 लोगों को एक महीने तक च्युंइगम न खाने की सलाह दी। इनमे से कई लोग दिन भर में एक घंटे और कई 6 घंटे से अधिक च्युंइगम चबाने के आदी थे। लेकिन इस चक्कर में अनजाने ही सिरदर्द मोल ले लेते हैं। 
महीने बाद पाया गया कि 30 में से 19 लोगों में सिरदर्द की शिकायत गायब हो गई और सात लोगों ने सिरदर्द में कमी की बात कही। इसके बाद 30 में से 20 लोगों को दोबारा च्युंइगम चबाने के लिए कहा गया और उन्होंने दोबारा इस आदत को शुरू करने पर पाया कि वे सभी कुछ दिन बाद ही सिरदर्द से ग्रसित हो गए। इससे पहले भी च्युंइगम चबाने के कारण सिरदर्द के होने का पता था लेकिन इसकी वजह च्युंइगम को मीठा करने के लिए डाले गए स्वीटनर एस्पारटेम को माना जाता था। डॉ. वॉटेमबर्ग के अनुसार च्युंइगम चबाने के कुछ देर तक ही मीठा लगता है जिससे यह पता चलता है कि उसमे इतनी अधिक मात्रा मे एस्पारटेम नहीं है कि उसकी वजह से सिरदर्द की शिकायत हो जाए। उनके अनुसार लोग मिठास जाने के बाद भी च्युंइगम चबाते रहते हैं। 

उन्होंने कहा कि अगर एस्पारटेम की वजह से सिरदर्द होता तो जो लोग डाइट ड्रिंक या उन उत्पादों का सेवन करते हैं उन्हें दर्द होता (जिनमें इसे डाला जाता है) लेकिन ऐसा नहीं होता है। उनका यह शोध इस तथ्य को साबित करता है कि च्युंइगम चबाने से दोनों जबड़ों की जोड़ पर ज्यादा जोर पड़ता है। 

ज्यादा देर तक चबाने से जबड़ों की जोड़ टेम्पोरोमैडीब्यूलर (टीएमजे) पर अत्यधिक दबाव पडता है और इस जबड़े का सिरा दिमाग की नसों से जुड़ा होता है। 

क्या है आदर्श वजन health in hindi tips

क्या है आदर्श वजन 
आदर्श वजन होने का अर्थ यह नहीं है कि आपका शरीर भी आदर्श स्थिति में है। लगभग सभी के शरीर के फीचर्स बदलते रहते हैं। इसीलिए आदर्श वजन एक चिकित्सकीय परिभाषा है जिसका अर्थ यह है कि आपकी उम्र, लिंग और लंबाई के आधार पर आपका वजन इतना होना चाहिए। 

चिकित्सक एक अलग आधार पर ही यह तय करता है कि आप मोटे हैं या नहीं। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), कमर के घेरे और नितंब तथा कमर के घेरे का अनुपात आदि फॉर्मूलों के आधार पर आप मोटे या ओवरवेट हैं या नहीं, तय किया जाता है। किसी भी वयस्क के लिए बीएमआई अगर 18.5 से 25 के बीच हो तो ठीक समझी जाती है। 

यदि 30 से अधिक हो तो आप ओवरवेट हैं। यदि इससे भी अधिक हो तो आप ओबेस यानी बहुत मोटे की श्रेणी में आते हैं। वजन कम करने के लिए बीएमआई हमेशा विश्वसनीय नहीं होता। 

इसकी वजह यह है कि जो लोग बॉडी बिल्डिंग करते हैं, उनकी मांसपेशियों का वजन शरीर में उपस्थित वसा से अधिक होता है इसलिए कसरती शरीर वालों का बीएमआई हमेशा अधिक होगा। इसी तरह बुजुर्गों के लिए बीएमआई यदि 25 से 27 के बीच हो तो उनके लिए ठीक रहता है। 

यदि आपकी उम्र 65 से अधिक है तो अधिक बीएमआई अस्थिक्षरण से सुरक्षा प्रदान करता है। बच्चों में मोटापा एक बड़ी समस्या के रूप में तेजी से उभर रहा है इसलिए मोटे बच्चों के लिए बीएमआई कैल्क्यूलेटर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बच्चे का आदर्श वजन किसी योग्य चिकित्सक से तय कराएं। 

आदर्श वजन महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग होता है। यहां तक कि एशियाई और कॉकेशियन नस्ल की महिलाओं के आदर्श वजन में भी फर्क हो सकता है। यदि कोई महिला पूरे 5 फुट की है तो उसका आदर्श वजन 45.500 किलो होना चाहिए। यदि लंबाई 5 फुट से कम हो तो हरेक इंच पर 2 किलो 700 ग्राम वजन गणना में कम कर देना चाहिए।

अब यह तय कीजिए कि आपके शरीर का ढांचा छोटा, मध्यम या बड़े आकार का है। इसे जानने का एक बहुत ही आसान तरीका है। अपनी कलाई का नाप लीजिए। यदि यह पूरे 6 इंच हो तो आपके शरीर का ढांचा मध्यम आकार का है। इसी तरह यदि कलाई का नाप 6 इंच से कम आता है तो अपने आदर्श वजन में से 10 प्रतिशत घटा दें। यदि ज्यादा आता है तो जाहिर है कि आपके शरीर का ढांचा बड़ा है, इसलिए आदर्श वजन में 10 प्रतिशत बढ़ा दें। 

पुरुषों के लिए यदि कोई पुरुष पूरे 5 फुट का है तो उसका आदर्श वजन 48 किलो 200 ग्राम होना चाहिए। यदि कलाई का नाप ठीक 7 इंच हो तो आपके शरीर का ढांचा मध्यम आकार का है। यदि कलाई का नाप 7 इंच से कम है तो आपके शरीर का ढांचा छोटा है। इसलिए आदर्श वजन में 10 प्रतिशत कम कर लें। 

यदि कलाई का नाप 7 इंच से अधिक आता है तो आपके शरीर का ढांचा बड़े आकार का है तो आदर्श वजन में 10 प्रतिशत का इजाफा कर लें। जो पुरुष बॉडी बिल्डिंग करते हैं उनके मामले में आदर्श वजन फर्क हो सकता है। 

हमेशा याद रखें कि वजन कम करने की जरूरत सभी को नहीं होती। वजन कम करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर लें। केवल परिजनों या दोस्तों की सलाह पर ही भरोसा न करें

कैसा है आपका बॉडी मास इंडेक्स

                                                                                                                                                                                           
  फॉर्मूले वजन तय करने आमतौर पर लोगों को अपना आदर्श वजन कितना हो इसकी                           जानकारी नहीं होती। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) या ऐसे हीके लिए कितने कारगर                                          हैं? क्या कमर और नितंब के अनुपात से आदर्श वजन का पता चल है?

          
                                       चिकित्सा विज्ञान यह तय कर चुका है कि शरीर की अतिरिक्त चर्बी                                        स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा                                          सच है कि अपनी खुराक में वसा को बिलकुल शून्य कर देने के                                          परिणाम भी बहुत बुरे होते हैं। वसा न हो तो शरीर में नर्व सेल्स                                          और हारमोंस ही बनना बंद हो जाएंगे। साथ ही वसा में घुलने वाले                                        कुछ विटामिन भी ऐसे ही बाहर निकल जाएंगे। 

इसलिए यह प्रश्न बहुत जटिल हो जाता है कि आखिर कितनी कैलोरी रोज खाएं ताकि आदर्श वजन बरकरार रहे? इसका उत्तर सभी के लिए एक सरीखा नहीं हो सकता। इसलिए जानना जरूरी होगा कि आदर्श वजन कितना है। ऐसे कई चार्ट्स और फॉर्मूले हैं जिनसे शरीर की लंबाई और वजन के अनुपात से आदर्श वजन मालूम किया जा सकता है। 

कुछ चिकित्सा पद्धतियों में शरीर की वसा के स्तर को सटीक तरह से नापा जा सकता है। अब चूंकि आपका सही वजन मसल्स मॉस जितना हो इस पर निर्भर करता है इसलिए आदर्श वजन यह हो सकता है।